राजस्थान पंचायत चुनाव 2026 टल सकते हैं: OBC आरक्षण रिपोर्ट में देरी से बढ़ी अनिश्चितता

राजस्थान में प्रस्तावित पंचायत चुनाव 2026 समय पर होने को लेकर अब अनिश्चितता बढ़ती दिख रही है। इसकी मुख्य वजह OBC आरक्षण तय करने वाली आयोग की रिपोर्ट में देरी है। यदि समय पर रिपोर्ट नहीं आती है तो पंचायत चुनाव निर्धारित समय से आगे टल सकते हैं।

दरअसल, राजस्थान राज्य अन्य पिछड़ा वर्ग आयोग ने राज्य के मुख्य सचिव वी. श्रीनिवास को पत्र लिखकर बताया है कि जनसंख्या के जो आंकड़े उपलब्ध कराए गए हैं, वे अपूर्ण और त्रुटिपूर्ण हैं। ऐसे में पंचायतों में वार्ड पंच के लिए OBC आरक्षण तय करना फिलहाल संभव नहीं है।

पंचायत चुनाव 2026 की समयसीमा और हाईकोर्ट का आदेश

राजस्थान में पंचायत चुनावों को लेकर राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि 15 अप्रैल 2026 तक पंचायत और निकाय चुनाव कराए जाएं।

कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था:

  • 31 दिसंबर तक परिसीमन प्रक्रिया पूरी की जाए
  • परिसीमन का अंतिम नोटिफिकेशन जारी होने के बाद उसे चुनौती नहीं दी जा सकेगी
  • निर्धारित समयसीमा में चुनाव कराना जरूरी होगा

लेकिन OBC आरक्षण तय न होने के कारण अब इस समयसीमा का पालन करना मुश्किल नजर आ रहा है।

जनसंख्या आंकड़ों में बड़ी गड़बड़ी

OBC आयोग ने अपने पत्र में कई महत्वपूर्ण विसंगतियों का जिक्र किया है:

  • 403 ग्राम पंचायतों में कुल जनसंख्या और OBC जनसंख्या शून्य दर्शाई गई है
  • 118 ग्राम पंचायतों में कुल जनसंख्या 1 से 500 तक दर्ज की गई
  • 266 पंचायतों में जनसंख्या 501 से 1000 तक दिखाई गई

जबकि पंचायतीराज विभाग के अनुसार पंचायतों का गठन 1200 से अधिक आबादी पर किया जाता है। इससे स्पष्ट है कि उपलब्ध डेटा में गंभीर त्रुटियां हैं।

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14,403 पंचायतों का पूरा डेटा मांगा

आयोग ने निर्देश दिया है कि सभी 14,403 ग्राम पंचायतों के संबंध में निम्न जानकारी उपलब्ध कराई जाए:

  • पंचायतवार कुल जनसंख्या
  • OBC जनसंख्या
  • SC/ST आरक्षण संबंधी आंकड़े

यह डेटा जनाधार प्राधिकरण और पंचायती राज विभाग राजस्थान से मांगा गया है।

आयोग को अब तक नहीं मिली पूरी जानकारी

आयोग के अनुसार:

  • 24 फरवरी 2026 तक आवश्यक डेटा प्राप्त नहीं हुआ
  • SC/ST आरक्षण से जुड़ी जानकारी भी अधूरी है
  • पंचायतवार जनसंख्या के स्पष्ट आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं

इस कारण आयोग अभी तक OBC आरक्षण की अंतिम रिपोर्ट तैयार नहीं कर पाया है।

चुनाव में देरी की आशंका क्यों?

सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि आयोग को अभी तक सही डेटा नहीं मिला है तो वह 31 मार्च तक अपनी रिपोर्ट कैसे सौंप पाएगा?

संभावना जताई जा रही है कि:

  • आयोग फिर से कार्यकाल बढ़ाने की मांग कर सकता है
  • या सरकार कोर्ट से अतिरिक्त समय मांग सकती है

सरकार के पास कोर्ट जाने के 4 विकल्प

विशेषज्ञों के अनुसार राज्य सरकार के पास चार संभावित रास्ते हैं:

  1. अदालत से OBC आरक्षण तय करने के लिए अतिरिक्त समय मांगना
  2. बिना OBC आरक्षण के चुनाव कराने का विकल्प
  3. आरक्षित वर्ग के अधिकारों की रक्षा के लिए समय बढ़ाने की मांग
  4. “वन स्टेट वन इलेक्शन” मॉडल लागू करने के लिए समय लेना

आयोग पहले भी देरी से दे चुका है रिपोर्ट

राजस्थान सरकार ने 9 मई 2025 को OBC राजनीतिक प्रतिनिधित्व आयोग का गठन किया था। इसके अध्यक्ष मदन लाल भाटी बनाए गए थे।

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लेकिन आयोग समय पर रिपोर्ट नहीं दे पाया, जिसके कारण:

  • सरकार पहले ही 3 बार कार्यकाल बढ़ा चुकी है
  • पहले समयसीमा 31 दिसंबर तक बढ़ाई गई
  • बाद में इसे 31 मार्च 2026 तक बढ़ाया गया

नगर निकाय चुनाव भी विवाद में

इससे पहले राज्य सरकार 113 नगर निकाय चुनाव स्थगित कराने के लिए भारत का सर्वोच्च न्यायालय पहुंच चुकी है।

सरकार ने दलील दी है कि:

  • हाईकोर्ट ने 113 शहरी निकायों के वार्ड परिसीमन को रद्द कर दिया था
  • परिसीमन प्रक्रिया दोबारा करनी होगी
  • इसलिए चुनाव कराने के लिए अतिरिक्त समय जरूरी है

क्या OBC आरक्षण के बिना चुनाव संभव है?

सूत्रों के अनुसार OBC आयोग की रिपोर्ट के बिना भी चुनाव संभव हैं, लेकिन यह अंतिम फैसला अदालत के निर्देशों पर निर्भर करेगा।

एक अधिकारी के अनुसार:

  • अगर रिपोर्ट समय पर आ जाती है तो
  • 7 दिन के भीतर OBC सीटों का आरक्षण तय किया जा सकता है

निष्कर्ष

राजस्थान में पंचायत चुनाव 2026 की प्रक्रिया फिलहाल OBC आरक्षण के मुद्दे पर अटकी हुई दिखाई दे रही है। यदि आयोग समय पर रिपोर्ट नहीं दे पाता है तो राज्य सरकार को कोर्ट से अतिरिक्त समय मांगना पड़ सकता है। ऐसे में पंचायत चुनावों के निर्धारित समय पर होने को लेकर संशय बना हुआ है।